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Showing posts from December, 2025

कोई अपना सा

 अनेक चेहरों की भीड़ में  वह चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लगता हैं शायद उसके साथ कोई रिश्ता पुराना लगता है जीवन की आपा-धापी में हो जाते हैं हम गुम पर वह जाने कहाँ से लाती हैं कुछ पल फुर्सत के चुन अपने लिए नहीं, पर हमारे लिए उन पलों में वह परियों की तरह पंख फैलाकर आती है और हमारी परेशानियाँ अपने संग उड़ा ले जाती है उन पलों में वह अपना हाल-ए दिल बयाँ नहीं करती पर खामोश रहकर हमारे दर्द बाँट ले जाती है जाने कहा से लाती है, कुछ पल फुर्सत के चुन उन पलों में वह लगती है अपनी कोई खास क्योंकि अपनी एक मुस्कुराहट से भर्ती है वह हमारे जीवन में एक नई आस उन पलों में वह कोई शोर-शराबा नहीं करती ढोल- नगाडे नहीं बजाती बस सिर्फ "कैसे हो" हौले से पूंछकर  सच बताऊँ बस इतना ही बोलकर  हमें अपना बना ले जाती है  साथ रहकर भी लोग अपने नहीं बन पाते  वह तो दूर से ही दिल चुरा ले जाती है  ऐसे लोगों के साथ से ही, एहसास से ही  ज़िन्दगी एक खूबसूरत ग़ज़ल बन जाती है || 

भारत प्यारा देश हमारा

 भारत प्यारा देश हमारा  सबसे रंगीला सबसे न्यारा  बहुतेरे ऋषि मुनियों ने अपने  कठोर तप से इसको सँवारा  कितने ही वीरों ने इसकी आज़ादी की खातिर  है अपने प्राणों को न्योंछारा  तो वहीँ महान वैज्ञानिकों ने अपने  अथाह ज्ञान से भारत को निखारा  अनेक प्रख्यात कवियों और लेखकों ने  अपने दैदीप्यमान शब्दों में भारत देश की गरिमा  का वर्णन किया है | मेरी तरफ से छोटी सी कोशिश है |  सोने की चिड़िया कहलाने वाला देश हमारा  जाने क्यूँ आज अपनी ही बहुत बेटियों से मांगता है सोना  जहाँ कभी आपसी भाई-चारे की बहती थी गंगा-यमुना  आज वहाँ अक्सर रंजिशों से त्रस्त है कोना-कोना  भृष्टाचार की पराकाष्ठा न पूँछिए आज  बिना अफसर की खातिरदारी किए यहां बनते नहीं काज  पर फिर भी - पर फिर भी  अगर कभी देश की आन पर आ जाती है बात  खड़े हो जाते हैं हम सब एक साथ  जब कभी कहीं भी मुसीबत में होते हैं हम सब भारतवासी  हमेशा बीच भंवर से हमारा देश कराता है हमारी निकासी  हैं कुछ कमियाँ इसमें पर किस देश में कमी नहीं होती  पर भा...

तस्वीर

 तस्वीर क्या है?  तस्वीर आपका जिया एक लम्हा है  लम्हा तो गुज़र जाता है पर उसकी यादों को  हम तस्वीर में उतार लेते हैं और जब कभी  मन करता है तो तसवीरें देखकर उन लम्हों को  फिर से जी लेते हैं |  हर तस्वीर की अपनी कहानी होती है  जो कभी भी नहीं पुरानी होती है  कुछ तस्वीरों के साथ मीठी यादें जुड़ी होती हैं  तो कुछ ग़मों के साए बिखेर देती हैं |  आज जब मैं तसवीरें टटोल रही थी  ऐसा लगा मानों ज़िन्दगी के पन्ने पलट रही थी |  तसवीरें देखकर पता चलता है की कैसे  बचपन में माँ हमें आड़े-तिरछे खड़ा कर और  रंग-बिरंगे कपड़े पहना कर घंटो हमारी फोटो  खींचती थी और आज हम भी वही करते हैं  बस हम फोटो के साथ-साथ बस दो-चार Reels और बना लेते हैं |  किताब न लाने पर टीचर का क्लास से बाहर खड़े करना  कॉलेज के बेफिक्रे दिन, हॉस्टल के मस्ती वाले दिन और  रात में छुप-छुपकर मैगी बनाना  सब तस्वीरों में नज़र आ जाता है  और दिल बहला जाता है |  शादी की तसवीरें तो अपनी अलग ही दास्ताँ बयाँ करती हैं  जब आँखों में नींद भरे...

तुम्हारे नयन / मृगनयनी

 तुम्हारे नयन आज भी याद आते हैं  मन की बगिया को महका जाते हैं  कभी कभी वो झुके झुके से नयन तुम्हारे  लगता है किसी से शरमाकर आए हैं  ओ मृगनयनी, तुम्हारे नयन आज भी याद आते हैं  कभी कभी वो मद्धम से मुस्कुराहट झलकाते नयन तुम्हारे  लगता है किसी ख़ास से मिलकर आए हैं  ओ मृगनयनी, तुम्हारे नयन आज भी याद आते हैं  कभी कभी वो आंसुओं के मोती झलकाते नयन तुम्हारे  लगता है दुःख हज़ार समेटे आये हैं  ओ मृगनयनी, तुम्हारे नयन आज भी याद आते हैं  कभी कभी वो नज़र चुराते तुम्हारे नयन  लगता है शरारत कोई कर के आए हैं  ओ मृगनयनी, तुम्हारे नयन आज भी याद आते हैं  कभी कभी वो रास्ते पर पलकें बिछाए नयन तुम्हारे  लगता है किसी के आने का इन्तजार करके आए हैं  ओ मृगनयनी तुम्हारे यह दो मतवाले नयन  लगता है सारा जग जीत कर आये हैं  हम तो हाल-ए-दिल बयाँ करने के लिए  शब्द ही खोजते रह गए  पर तुम्हारे नयन तुम्हारे दिल का  हाल सुनाकर आए हैं | 

कभी खैरियत तो पूँछों

 हम तो ज़िन्दगी जिए जा रहे थे इस मलाल में  कि कभी कोई खैरियत तो पूंछे की हम हैं किस हाल में  अपनी-अपनी ज़िन्दगी में रमे हैं सब  बस messages लिख कर खुश रहते हैं अब  जन्मदिन हो किसी का या हो कोई त्यौहार  बस चंद शब्द लिखकर ही हो जाता है व्यवहार  हम तो तरस जाते हैं सुनने को सबकी मधुर आवाज़  पता नहीं समय ने छेड़ा है कौन सा नया साज़  शायद आज का यही दस्तूर है  हम सब अपनी-अपनी परेशानियों में चूर हैं  वक़्त नहीं है पास एक-दूसरे के वास्ते  ना जाने किस ओर जाएंगे ये रास्ते  कभी संकोच तो कभी वक़्त न मिलने का होता है बहाना  पर अगर थोड़ा समय निकालकर  किसी की खैरियत पूंछ ली तो तय है  उसके चेहरे पर ख़ुशी की लहर का आना  अपने जीवन में इतने इतने मसरूफ भी ना रहो  हो सके तो अपने सुख-दुःख बाँटा भी करो  कुछ अपनी सुनाओ कुछ हमारी सुनो  ऐसे ही ज़िन्दगी के ताने-बाने बुनो  छोटी सी है ज़िन्दगी  क्या पता कल हो न हो  हो सके तो कुछ पल फुर्सत के निकालकर  किसी की खैरियत तुम पूँछ लेना ज़रा  इतना छोटा सा काम...

मन कर रहा है

 आज बहुत दिनों के बाद कुछ लिखने का मन कर रहा है  कि खुला आसमान देखकर उड़ने का मन कर रहा है  मन बाँधो मेरी इच्छाओं के पर  कि आज चाँद को छूने का मन कर रहा है  बहुत दिनों बाद कुछ लिखने के मन कर रहा है  उम्मीदों की बेड़ियों में मत जकड़ो मुझे  कि आज भरी बरसात  भीगने का मन कर रहा है  बहुत दिनों बाद कुछ लिखने के मन कर रहा है  कर्तव्यों के बोझ तले न दबाओ मुझे  कि आज कली से गुलाब बनने का मन कर रहा है  मुझे भी जी लेने दो अपनी इच्छा से  कि आज फिर साँस लेने का मन कर रहा है  मन कर रहा है बहुत मन कर रहा है  कि आज अपने को आइने में देख  दूसरों के लिए नहीं अपने लिए जीने का मन कर रहा है  आज बहुत दिनों बाद कुछ लिखने का मन कर रहा है 

नज़रें उठाकर देखो कुछ तो लाई हूँ

  गहने, कपड़े, रुपये पैसे  अरे ! देखो नहीं हमें ऐसे  यह सब कुछ भी चुराकर नहीं आई हूँ  पर फिर भी कुछ तो लाई हूँ | ज़िन्दगी की उलझनों से दुखी  अंधेरों में गुम थे कहीं तुम  पर मैं तुम्हारे लिए  प्यारी सी हंसीं चुराकर लाई हूँ |  नज़रें उठाकर देखो कुछ तो लाई हूँ  परेशानियों के घनघोर अंधेरों से घिरे  जीवन की भागमभाग में खुद को भूल गए तुम  पर मैं तुम्हारे लिए  फुर्सत के कुछ पल चुराकर लाई हूँ |  असफलताओं का सामना करते-करते  हिम्मत हार चुके थे तुम  पर मैं तुम्हारी आँखों के लिए  सपने हज़ार चुराकर लाई हूँ |  नज़रें उठाकर देखो कुछ तो लाई हूँ  मुसीबत के समय बहुतों के साथ छोड़ने से दुखी थे तुम  पर मैं तुम्हारे लिए  अपनों का प्यार चुराकर लाई हूँ  ज़िन्दगी से निराश हो  खुद को मिटाने चले थे तुम  पर मैं तुम्हारे लिए  आशाओं का नया सवेरा लाई हूँ  मैं कोई और नहीं  ज़िन्दगी हूँ तुम्हारी  और तुमसे मिलने आई हूँ | 

ये बेटियाँ जाने कब बड़ी हो जाती हैं

 कल शाम जब मैंने अपनी सहेली को उसकी ६ साल की बेटी के साथ टहलते देखा  तो मन जाने कहाँ बीते लम्हों में खो गया  और कुछ शब्द अपने आप कागज़ पर उतर गए |  थामा जब मैंने अपने हाथों में तुम्हारा नन्हा सा हाथ था  बड़ा ही खूबसूरत वह एहसास था  अपनी गोद के झूले में झुलाते थे तुम्हे  लोरी गाकर सुलाते थे तुम्हे  तुम्हे उंगली पकड़ कर चलना सिखाना  आज भी याद आता है  तुम्हे अपने हाथों से खाना खिलाना  कहाँ भूला जाता है  तुमने बोला जब अपना पहला शब्द था  क्या बताऊँ कितना प्रसन्न  मेरा यह मन था  प्यारी प्यारी बातें तुम्हारी  न जाने सुनाती तुम कितने किस्से कहानी  दिल तो चाहता था बस यही  कि थम जाए वक़्त वहीं  पर ऐसा भी कहाँ होता है  समय तो बस हाथ से रेत सा फिसलता है  कल तक जिसको उंगली पकड़कर चलना सिखाया  आज वह मुझे लैपटॉप चलाना सिखाती है  ये बेटियां जाने कब बड़ी हो जाती हैं  मेरे हाथों से खाना खाने वाली  आज मुझे पिज़्ज़ा, बर्गर बनाकर खिलाती हैं  बुरी नज़र से बचाने के लिए कल तक  जिसको मैं...