नज़रें उठाकर देखो कुछ तो लाई हूँ

 गहने, कपड़े, रुपये पैसे 

अरे ! देखो नहीं हमें ऐसे 

यह सब कुछ भी चुराकर नहीं आई हूँ 

पर फिर भी कुछ तो लाई हूँ |


ज़िन्दगी की उलझनों से दुखी 

अंधेरों में गुम थे कहीं तुम 

पर मैं तुम्हारे लिए 

प्यारी सी हंसीं चुराकर लाई हूँ | 


नज़रें उठाकर देखो कुछ तो लाई हूँ 


परेशानियों के घनघोर अंधेरों से घिरे 

जीवन की भागमभाग में खुद को भूल गए तुम 

पर मैं तुम्हारे लिए 

फुर्सत के कुछ पल चुराकर लाई हूँ | 


असफलताओं का सामना करते-करते 

हिम्मत हार चुके थे तुम 

पर मैं तुम्हारी आँखों के लिए 

सपने हज़ार चुराकर लाई हूँ | 


नज़रें उठाकर देखो कुछ तो लाई हूँ 


मुसीबत के समय बहुतों के साथ छोड़ने से दुखी थे तुम 

पर मैं तुम्हारे लिए 

अपनों का प्यार चुराकर लाई हूँ 


ज़िन्दगी से निराश हो 

खुद को मिटाने चले थे तुम 

पर मैं तुम्हारे लिए 

आशाओं का नया सवेरा लाई हूँ 


मैं कोई और नहीं 

ज़िन्दगी हूँ तुम्हारी 

और तुमसे मिलने आई हूँ | 


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