तुम्हारे नयन / मृगनयनी

 तुम्हारे नयन आज भी याद आते हैं 

मन की बगिया को महका जाते हैं 

कभी कभी वो झुके झुके से नयन तुम्हारे 

लगता है किसी से शरमाकर आए हैं 

ओ मृगनयनी, तुम्हारे नयन आज भी याद आते हैं 

कभी कभी वो मद्धम से मुस्कुराहट झलकाते नयन तुम्हारे 

लगता है किसी ख़ास से मिलकर आए हैं 

ओ मृगनयनी, तुम्हारे नयन आज भी याद आते हैं 

कभी कभी वो आंसुओं के मोती झलकाते नयन तुम्हारे 

लगता है दुःख हज़ार समेटे आये हैं 

ओ मृगनयनी, तुम्हारे नयन आज भी याद आते हैं 

कभी कभी वो नज़र चुराते तुम्हारे नयन 

लगता है शरारत कोई कर के आए हैं 

ओ मृगनयनी, तुम्हारे नयन आज भी याद आते हैं 

कभी कभी वो रास्ते पर पलकें बिछाए नयन तुम्हारे 

लगता है किसी के आने का इन्तजार करके आए हैं 

ओ मृगनयनी तुम्हारे यह दो मतवाले नयन 

लगता है सारा जग जीत कर आये हैं 

हम तो हाल-ए-दिल बयाँ करने के लिए 

शब्द ही खोजते रह गए 

पर तुम्हारे नयन तुम्हारे दिल का 

हाल सुनाकर आए हैं | 


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