कभी खैरियत तो पूँछों
हम तो ज़िन्दगी जिए जा रहे थे इस मलाल में
कि कभी कोई खैरियत तो पूंछे की हम हैं किस हाल में
अपनी-अपनी ज़िन्दगी में रमे हैं सब
बस messages लिख कर खुश रहते हैं अब
जन्मदिन हो किसी का या हो कोई त्यौहार
बस चंद शब्द लिखकर ही हो जाता है व्यवहार
हम तो तरस जाते हैं सुनने को सबकी मधुर आवाज़
पता नहीं समय ने छेड़ा है कौन सा नया साज़
शायद आज का यही दस्तूर है
हम सब अपनी-अपनी परेशानियों में चूर हैं
वक़्त नहीं है पास एक-दूसरे के वास्ते
ना जाने किस ओर जाएंगे ये रास्ते
कभी संकोच तो कभी वक़्त न मिलने का होता है बहाना
पर अगर थोड़ा समय निकालकर
किसी की खैरियत पूंछ ली तो तय है
उसके चेहरे पर ख़ुशी की लहर का आना
अपने जीवन में इतने इतने मसरूफ भी ना रहो
हो सके तो अपने सुख-दुःख बाँटा भी करो
कुछ अपनी सुनाओ कुछ हमारी सुनो
ऐसे ही ज़िन्दगी के ताने-बाने बुनो
छोटी सी है ज़िन्दगी
क्या पता कल हो न हो
हो सके तो कुछ पल फुर्सत के निकालकर
किसी की खैरियत तुम पूँछ लेना ज़रा
इतना छोटा सा काम तो कर लेना ज़रा
Comments
Post a Comment